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सीकेवाईसी हो जाने के बाद बैंक, बीमा, पेंशन फंड, और एसआईपी के लिए अलग-अलग केवाईसी नही करानी पढ़ेगी-उमेश कुमार सिंह

 

दाऊद फुरकान हिंदी

एक बार किसी भी ग्राहक की सीकेवाईसी हो जाने के बाद बैंक, बीमा, पेंशन फंड,और एस आईपी के अलग-अलग केवाईसी नही करानी पढ़ेगी। यें बातें केंद्रीय अपना ग्राहक जानो (सीकेवाईसीआर) की कार्यशाल में सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ सिक्योरिटाइज़ेशन एसेट रीकंस्ट्रक्शन एंड सिक्योरिटी इंटरेस्ट ऑफ इंडिया (सीईआरएसएआई) एमडी एवं सीईओ उमेश कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजधानी में एक निजी होटल में कही।

उन्होंने बताय कि सरसाई की स्थापना सरफासी अधिनियम के अंतर्गत केंद्रीय रजिस्ट्री के संचालन के उद्देश्य से 2011 में की गई। 2013 में केंद्रीय केवाईसी अभिलेख रजिस्ट्री के संचालन और रखरखाव का कार्यभार भी सरसाई को सौंपा गया।

उमेश कुमार सिंह ने बताय कि कंपनी द्वारा संचालित केंद्रीय केवाईसी अभिलेख रजिस्ट्री वित्तीय क्षेत्र के सभी चार प्रमुख नियामकों यानी रिज़र्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण और पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण की प्रतिवेदक संस्थाओं को केवाईसी रजिस्ट्री सेवाएं दी जाती हैं।

सीईआरएसएआई एमडी एवं सीईओ ने बताया कि आज आप किसी भी चल-अचल जमीन की खरीद करते है तो हमारे यहां के रिकार्ड में सर्च के बाद ही लोन दिया जाता है पहले एक ही जमीन को कई बैंकों से लोन ले लेते थे वह अब नही हो सकता है यदि कोई बैंक हमारे रिकार्ड के बिना लोन देता है तो वह उसकी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने बताय कि किसी भी तरह की संपत्ति के ऊपर प्रतिभूति हित अथवा किसी अन्य प्रकार के ऋण-भार की पूरी सूचना प्रविष्ट करने के उद्देश्य से रजिस्ट्री अब सभी प्रकार के ऋणदाताओं को अपने प्रतिभूति हित को प्रविष्ट करने की, कुर्की आदेश और न्यायालयों द्वारा पारित आदेश प्रविष्ट करने की सुविधा प्रदान करती है।

उमेश कुमार सिंह ने बताया कि नवंबर 2024 से, अविनियमित जमा योजनाओं (बीयूडीएस (पोंजी स्कीमों पर भी ) रजिस्ट्री पर प्रतिबंध (नियामित निवेश पोर्टल के माध्यम से) सभी संबंधित हितधारकों और आम जनता के लिए सुलभ कर दी गई है। यह सार्वजनिक पोर्टल उन जमा लेने वालों के बारे में जानकारी एकत्रित और प्रकाशित करता है जो देश में संचालन कर रहे हैं, उनका कार्य क्षेत्र और संचालन के क्षेत्र, जमा लेने वाली संस्थाओं के खिलाफ लागू कानूनों के तहत उठाए गए किसी भी प्रवर्तन कार्रवाई के तहत जमा धारकों की पुनर्स्थापना के लिए चल रही कार्रवाइयां होती है जैसे सहारा की योजनाओं पर कार्रवाइयां की गयी हैं।

कार्यक्रम में रॉबिन रावल, अतिरिक्त निदेशक, एफआईयू-भारत, वीपी सिंह, डीजीएम, सीईआरएसएआई, प्रभात कुमार शर्मा, सीजीएम, बैंक ऑफ बड़ौदा,

शुधांशु कुमार सिंह, जीएम, बैंक ऑफ बड़ौदा, शैलेन्द्र कुमार सिंह, जीएम, बैंक ऑफ बड़ौदा और संयोजक एसएलबीसी-यूपी भारी संख्या में बैंकों कर्मीय मौजूद रहें।

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