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यूपी सिविल सचिवालय बैंक पर RBI की सख्ती बरकरार, जमाकर्ताओं की मुसीबतें बढ़ीं; प्रतिबंध तीन माह और बढ़ा

 वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल

 उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित ‘यूपी सिविल सचिवालय प्राथमिक सहकारी बैंक लिमिटेड’ के ग्राहकों के लिए बुरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय अनियमितताओं और बिगड़ती आर्थिक सेहत के चलते बैंक पर लगाई गई कड़ी पाबंदियों को और तीन महीने के लिए बढ़ा दिया है। इस विस्तार से यह स्पष्ट हो गया है कि बैंक के हालात सुधरने के बजाय और बदतर हो गए हैं, जिसकी सीधी मार आम जमाकर्ताओं पर पड़ रही है।

क्या है मामला? केंद्रीय बैंक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सचिवालय सहकारी बैंक पर पहली बार 11 मार्च 2026 को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A के तहत निर्देश जारी किए गए थे। छह महीने की यह अवधि 11 सितंबर 2026 को समाप्त हो रही थी, लेकिन RBI ने जनहित में इसे आगे बढ़ाना जरूरी समझा। अब ये प्रतिबंध 11 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे।

RBI की दो टूक: स्थिति चिंताजनक सबसे गंभीर बात यह है कि RBI ने स्पष्ट किया है कि इस विस्तार का अर्थ यह कतई नहीं लगाया जाना चाहिए कि वह बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है। नियामक की इस टिप्पणी से साफ संकेत मिलते हैं कि बैंक का प्रबंधन और उसकी बैलेंस शीट गहरे संकट में है।

इन निर्देशों के तहत, बैंक अपनी मर्जी से नया ऋण नहीं दे सकता, कोई निवेश नहीं कर सकता, और न ही अपनी देनदारियों में कोई बदलाव कर सकता है। हालांकि, जमाकर्ताओं को बड़ी राहत (पूरी निकासी) मिलेगी या नहीं, इस पर चुप्पी साधी गई है, जिससे ग्राहकों में अपनी गाढ़ी कमाई को लेकर अनिश्चितता का माहौल और गहरा गया है। यह सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में व्याप्त कुप्रबंधन पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

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