जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस पर आरबीआई का तगड़ा चाबुक; केवाईसी नियमों को हवा में उड़ाने की मिली सजा, लगा भारी जुर्माना
वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल
: देश के हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर से इस वक्त की एक बेहद चिंताजनक और बड़ी खबर सामने आ रही है। ग्राहकों के भरोसे और नियामक नियमों की धज्जियां उड़ाने के आरोप में ‘जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड’ को रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने तगड़ा झटका दिया है। केंद्रीय बैंक ने ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) और रिस्क गाइडलाइंस की अनदेखी करने के जुर्म में कंपनी पर ₹3.10 लाख का मौद्रिक जुर्माना ठोक दिया है। मुख्य महाप्रबंधक बृज राज द्वारा जारी इस आदेश के बाद वित्तीय गलियारों में हड़कंप मच गया है।
खातों की सुरक्षा ताक पर, रिस्क रिव्यू सिस्टम हुआ फेल! नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) द्वारा की गई ‘स्टैच्यूचरी इंस्पेक्शन’ (वित्तीय स्थिति 31 मार्च, 2025) की जांच में जो कड़वी हकीकत सामने आई है, उसने सबको चौंका दिया है। जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के भीतर ग्राहकों के खातों की सुरक्षा पूरी तरह से राम-भरोसे चल रही थी। नियमों के मुताबिक, कंपनी को हर छह महीने में कम से कम एक बार सभी खातों के ‘जोखिम वर्गीकरण’ (Risk Categorization) की समय-समय पर समीक्षा (Periodic Review) करने की एक मजबूत व्यवस्था बनानी थी। लेकिन कंपनी का लचर और सुस्त मैनेजमेंट इस अनिवार्य राष्ट्रीय सुरक्षा गाइडलाइन को पूरी तरह से डकार गया।
कानूनी शिकंजे में फंसी कंपनी, अधिकारियों की बोलती बंद! इस गंभीर चूक के बाद जब आरबीआई ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, तो उनके अधिकारी व्यक्तिगत सुनवाई और लिखित जवाब में कोई भी ठोस दलील पेश नहीं कर पाए। आखिरकार, नेशनल हाउसिंग बैंक एक्ट, 1987 की धारा 52A के तहत चाबुक चलाते हुए आरबीआई ने इस जुर्माने पर मुहर लगा दी। भले ही आरबीआई ने कहा है कि इससे मौजूदा ग्राहकों के ट्रांजैक्शन की वैधता पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि बड़े-बड़े वादे करने वाली यह फाइनेंस कंपनी आंतरिक रूप से कितनी खोखली और लापरवाह हो चुकी है!
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