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कर्जदारों की जेब पर डाला डाका! तय ब्याज से ज्यादा वसूल रहा था बैंक; RBI की जांच में खुला सरकारी बैंक का काला खेल

 बैंक ऑफ बड़ौदा पर रिज़र्व बैंक का भयंकर चाबुक; नियमों को ठेंगे पर रखने की मिली सजा, लगा ₹63.60 लाख का जुर्माना

वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल

देश के बैंकिंग सेक्टर से इस वक्त की बेहद शर्मनाक और बड़ी खबर सामने आ रही है। ग्राहकों के भरोसे का गला घोंटते हुए सरकारी क्षेत्र के दिग्गज ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ (BoB) को रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ज़बरदस्त झटका दिया है। केंद्रीय बैंक ने ‘फेयर प्रैक्टिसेज कोड’ और ‘केवाईसी’ नियमों की धज्जियां उड़ाने के जुर्म में बैंक पर ₹63.60 लाख का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया है। मुख्य महाप्रबंधक बृज राज द्वारा जारी इस आदेश के बाद वित्तीय गलियारों में हड़कंप मच गया है।

लोन धारकों के साथ सरेआम धोखाधड़ी! आरबीआई की ‘सुपरवाइजरी इवैल्यूएशन’ (ISE 2025) की खुफिया जांच में जो खुलासा हुआ है, वह किसी वित्तीय डकैती से कम नहीं है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने कई मासूम कर्जदारों के लोन खातों में समझौते (Contract) की तय दरों से कहीं ज्यादा ब्याज वसूल कर अपनी तिजोरी भरी। सीधे शब्दों में कहें तो बैंक ने लोन की शर्तों को सरेआम धोखा देकर ग्राहकों की जेब पर डाका डाला।

डिजिटल सुरक्षा ताक पर, CKYCR पोर्टल को डकारा! लापरवाही की हद यहीं खत्म नहीं हुई। बैंक ने ‘नो योर कस्टमर’ (KYC) जैसे अति-संवेदनशील सुरक्षा नियमों को भी हवा में उड़ा दिया। नियमों के मुताबिक ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड्स को ‘सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री’ (CKYCR) पर तय समय में अपलोड करना था, लेकिन बैंक का लचर सिस्टम इसे डकार गया, जिससे डिजिटल सुरक्षा खतरे में पड़ गई। जब आरबीआई ने कारण बताओ नोटिस जारी किया, तो बैंक के आला अधिकारी व्यक्तिगत सुनवाई में कोई ठोस सफाई नहीं दे पाए। हालांकि आरबीआई ने कहा है कि इससे ग्राहकों के चालू एग्रीमेंट की वैधता पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इस भारी जुर्माने ने साबित कर दिया है कि सरकारी बैंक के भीतर किस कदर प्रशासनिक अराजकता मची हुई है!

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