वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल |
एक हादसे में अपना पैर गंवाने के बावजूद बुलंद हौसलों और अदम्य साहस की मिसाल पेश करने वाले सेना के सेवानिवृत्त मेजर एके सिंह ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया है। ‘क्लब ऑफ लखनऊ’ द्वारा गोमतीनगर स्थित एक होटल में आयोजित ‘ए ट्रैवलॉग: अराउंड द वर्ल्ड सेलिंग इन ए बोट’ कार्यक्रम में मेजर सिंह ने एक पैर के सहारे नाव से पूरी दुनिया की परिक्रमा करने के अपने अदम्य एवं रोमांचक सफर की यादें साझा कीं।
हादसों से भी नहीं टूटा हौसला
मेजर एके सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1978 में ही विश्व भ्रमण की योजना बना ली थी, लेकिन उस समय पर्याप्त संसाधनों, उपकरणों और धन का भारी अभाव था। इसी बीच हैंग ग्लाइडिंग के दौरान हुए एक भीषण हादसे में उनका बायाँ पैर काटना पड़ा। इस गंभीर शारीरिक क्षति के बावजूद उनके इरादे नहीं डगमगाए और उन्होंने अपने जीवन के सबसे बड़े अभियान को पूरा करने का संकल्प बनाए रखा।
50 हजार किलोमीटर का कठिन समुद्री सफर
संसाधनों को जुटाते हुए इंग्लैंड से करीब साढ़े छह लाख रुपये में एक पुरानी नाव खरीदी गई। इसके बाद मुंबई के तट से ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत हुई। तूफानों की थपेड़ों और समुद्र की खौफनाक लहरों से जूझते हुए छह सदस्यीय टीम ने भूमध्य सागर और लाल सागर को सफलतापूर्वक पार किया। वर्ष 1985 से 1987 के बीच साढ़े 15 महीने के कड़े संघर्ष में उन्होंने 50 हजार किलोमीटर की अकल्पनीय समुद्री यात्रा पूरी की।
दिग्गज हस्तियों ने की अदम्य साहस की सराहना
कार्यक्रम में क्लब ऑफ लखनऊ के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, पूर्व मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय तथा सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विष्णु सहाय की गरिमामयी मौजूदगी रही। सभी गणमान्य अतिथियों ने मेजर सिंह के जज्बे और कभी न हार मानने वाली अदम्य इच्छाशक्ति को नमन करते हुए उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

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