इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सरकार ने दूर किए भ्रम
भ्रामक दावों पर तथ्यात्मक जवाब
वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) कार्यक्रम को लेकर उठ रही शंकाओं और भ्रामक जानकारियों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि यह कार्यक्रम किसी जल्दबाजी का परिणाम नहीं, बल्कि दो दशकों से अधिक समय तक चले वैज्ञानिक अध्ययन, नीति निर्माण और व्यापक परामर्श का निष्कर्ष है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ई20 कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है।
20 वर्षों की योजनाबद्ध यात्रा
मंत्रालय के अनुसार भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में हुई थी। वर्ष 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और उसके बाद विभिन्न मंत्रालयों, वाहन निर्माताओं तथा तेल कंपनियों के समन्वय से इसकी मजबूत आधारशिला तैयार की गई। चरणबद्ध तरीके से मिश्रण बढ़ाते हुए देश ने वर्ष 2025-26 में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया।
वाहनों की सुरक्षा पर सरकार का भरोसा
सरकार ने कहा कि ई20 लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, एआरएआई, एसआईएएम तथा तकनीकी विशेषज्ञों के साथ व्यापक परीक्षण और परामर्श किए गए। लाखों वाहनों के वास्तविक उपयोग के दौरान इंजन, रबर पार्ट्स या ईंधन प्रणाली को व्यापक नुकसान का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट सूचनाओं से सावधान रहने की अपील की है।
किसानों और अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ
सरकार के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक लगभग 1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत, 316 लाख टन कच्चे तेल का आयात प्रतिस्थापित, 952 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। इससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
स्वच्छ ईंधन, सुरक्षित भविष्य
मंत्रालय ने कहा कि ई20 केवल वैकल्पिक ईंधन नहीं बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, मूल्य स्थिरता और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने का प्रभावी माध्यम है। सरकार ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर और पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक सशक्त बनाएगी।
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