– वित्तीय समावेशन की पाठशाला
भक्ति, आस्था और उल्लास के पावन पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव यानी गणेश चतुर्थी का पर्व आज पूरे देश में हर्षोल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ आरंभ हो गया है। विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के आगमन को लेकर हर तरफ उत्सव जैसा माहौल है। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक गजानंद की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जा चुकी हैं, और ‘गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा है।

सनातन संस्कृति में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और सभी संकटों को हरने वाला ‘विघ्नहर्ता’ माना जाता है। गणेश चतुर्थी का यह पावन पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस अवसर पर विशेष रूप से मुख्य महाप्रबंधक श्री सुधीर कुमार गुप्ता, उप महाप्रबंधक श्री सतीश कुमार सोनकर तथा सहायक महाप्रबंधकद्वय/त्रय—श्री संजय सरीन, श्री विकास कुमार, श्री आदित्य रंजन, श्री शशांक मिश्रा और श्री नवनीत सहित तमाम गणमान्य अधिकारियों और देशवासियों ने भगवान गणेश के चरणों में शीश नवाकर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की मंगलकामना की है।

शास्त्रों के अनुसार, गणेशोत्सव के इन दस दिनों में सच्चे मन से बप्पा की आराधना करने से मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और सौभाग्य के दाता हैं, जिनकी कृपा से हर कार्य में सफलता हासिल होती है। इस पावन अवसर पर विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। आइए, इस गणेश चतुर्थी पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि विघ्नहर्ता के आशीर्वाद से समाज से हर प्रकार की बुराइयों और कठिनाइयों का नाश हो तथा हमारा देश प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे।
Vittiya Samaveshan Ki Pathshala
