वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। आरआरबी का कुल बकाया ऋण 10.3 प्रतिशत बढ़कर ₹5.78 लाख करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹5.24 लाख करोड़ था। यानी एक साल में ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग ऋण का प्रवाह करीब ₹54,186 करोड़ बढ़ा।
भारतीय रिजर्व बैंक के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) मानकों के तहत भी आरआरबी का प्रदर्शन मजबूत रहा। प्राथमिकता क्षेत्र के लिए निर्धारित 75 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले आरआरबी की औसत उपलब्धि 91.7 प्रतिशत ANBC रही। लगभग सभी आरआरबी निर्धारित लक्ष्य हासिल करने में सफल रहे।
कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियां आरआरबी के ऋण पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा आधार बनी रहीं। कृषि क्षेत्र को ₹3.78 लाख करोड़ का ऋण दिया गया, जो कुल प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का लगभग 77 प्रतिशत है। इसमें लगभग 98 प्रतिशत ऋण कृषि एवं किसान आधारित गतिविधियों के लिए रहा। इससे फसल उत्पादन, पशुपालन सहित अन्य ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को वित्तीय मजबूती मिली।
ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में भी आरआरबी की भूमिका अहम रही। एमएसएमई क्षेत्र को ₹66,978 करोड़ का ऋण मिला। इसमें 95 प्रतिशत से अधिक ऋण सूक्ष्म उद्यमों तक पहुंचा। इसका लाभ छोटे कारोबारियों, कारीगरों, स्वरोजगार से जुड़े लोगों और पहली बार कारोबार शुरू करने वाले उद्यमियों को मिला।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू कमजोर वर्गों तक संस्थागत ऋण की पहुंच है। आरआरबी ने कमजोर वर्गों को ₹3.49 लाख करोड़ का ऋण उपलब्ध कराया। आवास, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए ऋण ने समावेशी विकास की गति को भी मजबूती दी।
RRBs का यह प्रदर्शन बताता है कि ग्रामीण भारत में किसान, छोटे उद्यमी और कमजोर वर्गों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक आज भी मजबूत आधारस्तंभ बने हुए हैं।
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