KYC अनुपालन में चूक पर RBI का शिकंजा
ग्राहक जोखिम वर्गीकरण में कमी मिली
जनवरी से नवंबर 2025 के संचालन की हुई वैधानिक जांच
। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियामकीय अनुपालन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए ओला फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर ₹3.10 लाख का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। RBI ने यह कार्रवाई 24 सितंबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से की। मामला Know Your Customer (KYC) से संबंधित निर्देशों के अनुपालन में कमी का है।
जोखिम वर्गीकरण में चूक
RBI के अनुसार कंपनी कुछ ग्राहकों का निर्धारित जोखिम वर्गीकरण (Risk Categorisation) करने में विफल रही। वित्तीय संस्थानों के लिए ग्राहक की जोखिम श्रेणी निर्धारित करना KYC अनुपालन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी नियामकीय कमी को आधार बनाकर केंद्रीय बैंक ने दंडात्मक कार्रवाई की।
2025 में हुई जांच
RBI ने कंपनी के जनवरी 2025 से नवंबर 2025 तक के परिचालन को आधार बनाकर वैधानिक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सामने आए पर्यवेक्षी निष्कर्षों और संबंधित पत्राचार के आधार पर कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी से पूछा गया कि नियामकीय निर्देशों के अनुपालन में कथित कमी के लिए उस पर जुर्माना क्यों न लगाया जाए।
जवाब के बाद फैसला
कंपनी के लिखित जवाब, बाद में दिए गए अतिरिक्त अभ्यावेदनों तथा व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दलीलों पर RBI ने विचार किया। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने पाया कि कुछ ग्राहकों का जोखिम वर्गीकरण नहीं किया जाना प्रमाणित हुआ और यह कमी मौद्रिक दंड की कार्रवाई को उचित ठहराती है।
नियामकीय संदेश स्पष्ट
RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन में कमियों से संबंधित है। इसका उद्देश्य कंपनी और उसके ग्राहकों के बीच किए गए किसी लेन-देन अथवा समझौते की वैधता पर निर्णय देना नहीं है।
केंद्रीय बैंक ने यह भी साफ किया कि ₹3.10 लाख का दंड लगाया जाना RBI द्वारा कंपनी के खिलाफ की जा सकने वाली किसी अन्य कार्रवाई के अधिकार को प्रभावित नहीं करता है। मामला वित्तीय संस्थाओं के लिए KYC व्यवस्था में सतर्कता और ग्राहक जोखिम आकलन की अहमियत को फिर रेखांकित करता है।
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