Breaking News

119वें उर्स की परचम कुशाई से हुआ आगाज़, राष्ट्रीय एकता का दिया संदेश

लखनऊ। हज़रत ख्वाजा मोहम्मद नबी रज़ा शाह उर्फ दादा मियाँ रहमतुल्लाह अलैह के 119वें उर्स मुबारक की तैयारियों का आगाज़ पारंपरिक परचम कुशाई के साथ हुआ। दरगाह दादा मियाँ, खानकाह शाहे रज़ा, मॉल एवेन्यू, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में सूफी परंपरा और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 21 से 25 रबीउल अव्वल, मुताबिक 04 से 08 सितम्बर 2026 तक आयोजित होने वाले 119वें उर्स से पूर्व परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। कानपुर से सूफी नूर मोहम्मद फसाहती अपने मुरीदों के साथ परचम लेकर पहुंचे, जिसे हज़रत ख्वाजा मोहम्मद सबाहत हसन शाह, सज्जादा नशीन व मुतव्वली दरगाह दादा मियाँ ने अपने मुबारक हाथों से लगाया।

परचम कुशाई से पहले महफिले समा का आयोजन हुआ, जिसमें कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समां बांध दिया। मस्जिद शाहे रज़ा के इमाम कारी अनवर ने परचम कुशाई की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा पर प्रकाश डाला।

सज्जादा नशीन हज़रत मोहम्मद सबाहत हसन शाह ने माहे रबीउल अव्वल शरीफ की मुबारकबाद देते हुए कहा कि उर्स दादा मियाँ राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सूफी संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने शासन-प्रशासन और पत्रकार बंधुओं से उर्स के सभी कार्यक्रमों में सहयोग की अपील की, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सके।

उर्स व मेला कमेटी के सचिव फरहत मियाँ ने बताया कि परचम कुशाई के साथ ही उर्स की सभी तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं। उन्होंने कहा कि सूफी परंपरा में परचम कुशाई आज भी श्रद्धा, एकता और आने वाले उर्स के संदेश का महत्वपूर्ण प्रतीक बनी हुई है।

About Vskp-Admin

Check Also

समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का मजबूत संकल्प

 मोहम्मद इकबाल कादरी और महमूद खान कादरी की मौजूदगी में मुल्क में अमन-चैन की माँगी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *