हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट के खातों पर हाई कोर्ट की सख्ती, डॉ. सचान के एकल संचालन पर लगी रोक
हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वित्तीय संचालन को लेकर अहम अंतरिम व्यवस्था दी है। अदालत ने ट्रस्ट के साथ उससे संचालित अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बैंक खातों के एकतरफा संचालन पर रोक लगा दी है। खास बात यह है कि अब डॉ. अमोद कुमार सचान अकेले इन खातों का संचालन नहीं कर सकेंगे।
न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह ने डॉ. अमोद कुमार सचान की ओर से संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अपीलीय अदालत के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया और दोनों अपीलों को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।
हाई कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत स्पष्ट किया कि अपील का नए सिरे से निस्तारण होने तक डॉ. सचान और प्रतिवादी रिचा मिश्रा अकेले या संयुक्त रूप से खातों का संचालन नहीं करेंगे। खातों का संचालन अब डॉ. सचान और ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी विक्रम सिंह संयुक्त रूप से करेंगे।
मनमानी निकासी पर अदालत की निगरानी
अदालत ने वित्तीय लेन-देन को लेकर भी स्पष्ट सीमाएं तय कर दी हैं। खातों से धनराशि केवल कर्मचारियों, स्टाफ और डॉक्टरों के वेतन, बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों की नियमित देनदारियों, बिजली-पानी के बिल, कर और अन्य वैधानिक भुगतान के लिए ही निकाली जा सकेगी।
हर निकासी और भुगतान का पूरा विवरण, उसकी प्रकृति और उद्देश्य अपीलीय अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यानी ट्रस्ट के पैसों के इस्तेमाल पर अब सिर्फ दावा नहीं, बल्कि हिसाब भी देना होगा।
चेयरमैन पद का विवाद पहुंचा हाई कोर्ट
मामला ट्रस्ट के चेयरमैन पद को लेकर डॉ. सचान और अन्य ट्रस्टियों के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। डॉ. सचान ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन), लखनऊ की अदालत में घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग को लेकर वाद दाखिल किया था।
2 अप्रैल 2026 को सिविल जज ने अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करते हुए प्रतिवादियों को डॉ. सचान के चेयरमैन के रूप में कार्य करने में हस्तक्षेप से रोक दिया था। इसके खिलाफ दाखिल अपीलों को अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश (एनआईए), लखनऊ ने 8 जुलाई को स्वीकार करते हुए अंतरिम निषेधाज्ञा समाप्त कर दी थी।
अब हाई कोर्ट ने उस आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने अपीलीय अदालत को निर्देश दिया है कि वह 9 सितंबर को दोनों पक्षों को सुनकर प्राथमिकता के आधार पर तीन सप्ताह के भीतर दोनों अपीलों का नए सिरे से निर्णय करे।
फिलहाल अदालत ने यह साफ कर दिया है कि अंतरिम निषेधाज्ञा का अंतिम सवाल दोनों पक्षों के दावों और उनके गुण-दोष पर विचार के बाद ही तय होगा। ऐसे में ट्रस्ट की कमान और वित्तीय अधिकारों को लेकर चल रहा विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन खातों के एकतरफा संचालन पर हाई कोर्ट की रोक ने डॉ. सचान के लिए स्थिति को फिलहाल आसान नहीं रहने दिया है।

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