वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल
“एक राष्ट्र, एक चुनाव” विषय पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने अपने लखनऊ प्रवास के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों तथा व्यापार एवं उद्योग संगठनों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श कर प्रस्तावित चुनावी व्यवस्था के विभिन्न संवैधानिक, प्रशासनिक और आर्थिक पहलुओं पर व्यापक संवाद किया।
संवैधानिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा
समिति ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल के पीठासीन अधिकारियों, विपक्ष के नेताओं तथा निर्वाचित सदस्यों से मुलाकात कर प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों, संघीय ढांचे, विधायी प्रक्रिया, केंद्र-राज्य संबंधों और भारत निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियों पर विस्तार से चर्चा की। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा राज्य सरकार के मंत्रियों ने भी अपने विचार समिति के समक्ष रखे।
राजनीतिक दलों ने रखा पक्ष
बैठक में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल, आम आदमी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) तथा अपना दल (एस) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी दलों ने “एक राष्ट्र, एक चुनाव” व्यवस्था की व्यवहारिकता, निर्वाचन सुधारों की आवश्यकता तथा संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
उद्योग जगत ने गिनाए आर्थिक प्रभाव
समिति ने उद्योग एवं व्यापार संगठनों से भी व्यापक संवाद किया। एक्ज़िम बैंक, NaBFID, MSME मंत्रालय, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), एसोचैम, इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स, दलित चैंबर ऑफ कॉमर्स मनीष वर्मा प्रदेश अध्यक्ष
देव मणि सरोज प्रदेश प्रवक्ता तथा आदर्श व्यापार मंडल सहित विभिन्न संस्थाओं ने बार-बार होने वाले चुनावों और आदर्श आचार संहिता से विकास परियोजनाओं, निवेश, उद्योग, प्रवासी श्रमिकों और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित किया।
तथ्य आधारित रिपोर्ट मांगी
संयुक्त संसदीय समिति ने सभी संस्थाओं से अनुभवजन्य आंकड़ों, शोध अध्ययनों और विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का आग्रह किया, ताकि प्रस्तावित व्यवस्था का मूल्यांकन ठोस तथ्यों और व्यावहारिक साक्ष्यों के आधार पर किया जा सके।
दिनभर चले विचार-विमर्श के बाद समिति ने विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों को आगामी रिपोर्ट के लिए महत्वपूर्ण आधार बताते हुए दिन की कार्यवाही संपन्न की।
Vittiya Samaveshan Ki Pathshala
