वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने एक बार फिर अपने राजनीतिक दर्शन और संगठनात्मक सोच को स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी की बुनियाद ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर टिकी है। पार्टी का दावा है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के बजाय संविधान की मूल भावना के अनुरूप सर्वसमाज के हित और कल्याण के लिए काम करना है।
बीएसपी के अनुसार, पार्टी संगठन में नेताओं से अधिक महत्व उन कार्यकर्ताओं का है, जो लंबे समय से तन, मन और धन से मिशन के प्रति समर्पित रहे हैं। पार्टी इसे मान्यवर कांशीराम की स्थापित संगठनात्मक परंपरा से जोड़ती है और मानती है कि मजबूत संगठन की असली ताकत जमीनी कार्यकर्ता ही होते हैं।
पार्टी ने कहा है कि अलग-अलग समाजों से जुड़े कुछ लोग समय-समय पर निजी स्वार्थों के कारण पार्टी से अलग हुए या दूसरी राजनीतिक पार्टियों में चले गए। बीएसपी का आरोप है कि ऐसे लोगों ने अपने समाज को पार्टी से जोड़ने की अपेक्षित भूमिका नहीं निभाई, जिसका असर पिछले कई चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर भी पड़ा।
इसके बावजूद पार्टी का कहना है कि पुराने, ईमानदार और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने का अभियान जारी रखा है। विशेष रूप से युवाओं को संगठन की ‘नर्सरी’ में तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी साफ-सुथरी, अनुशासित और संविधानवादी सोच के साथ आगे आए।
बीएसपी ने ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों से पार्टी के साथ मजबूती से जुड़े रहने की अपील की है। पार्टी ने कहा कि चुनावी भागीदारी में योग्य और तैयार लोगों को अवसर देने तथा सरकार बनने की स्थिति में सभी समाजों को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व देने की नीति जारी रहेगी।
पार्टी ने सर्वसमाज आधारित संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में दलित समाज की महत्वपूर्ण भूमिका भी रेखांकित की। बीएसपी का कहना है कि संगठन की वास्तविक शक्ति तभी बढ़ेगी, जब विभिन्न सामाजिक वर्ग एक साथ आकर संविधान, सामाजिक न्याय और समान भागीदारी के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
Vittiya Samaveshan Ki Pathshala
