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उत्तर प्रदेश में ‘वन हेल्थ’ सुरक्षा चक्र मजबूत:

 जूनोटिक रोगों की रोकथाम के लिए राज्य स्तरीय व्यापक मास्टर ट्रेनिंग शुरू

 

वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल

 उत्तर प्रदेश में पशुजन्य (जूनोटिक) और जनस्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले घातक पशु रोगों की निगरानी एवं त्वरित नियंत्रण के लिए पशुपालन विभाग ने एक बड़ी प्रशासनिक व तकनीकी पहल की है। राजधानी लखनऊ के होटल गोल्डन ट्यूलिप में आज से दो दिवसीय (09 एवं 10 जुलाई, 2026) राज्य स्तरीय ‘प्रशिक्षक प्रशिक्षण’ (ToT) कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस विशेष रणनीतिक अभियान को वैश्विक स्वास्थ्य संस्था ‘झपाइगो’ (Jhpiego) द्वारा अपनी GHS-RISE परियोजना के अंतर्गत तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिसका मुख्य ध्येय राज्य की महामारी वैज्ञानिक क्षमता को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करना है।

संदिग्ध मामलों की तत्काल रिपोर्टिंग अनिवार्य: विशेष सचिव देवेंद्र कुमार पाण्डेय ने दिए निर्देश

कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन करते हुए पशुपालन विभाग के विशेष सचिव श्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि इंसानों और पशुओं के बीच फैलने वाले जूनोटिक रोगों की सटीक निगरानी और समयबद्ध रिपोर्टिंग राष्ट्रीय सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के लिए अत्यंत संवेदनशील विषय है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी महामारी के संभावित (Probable) एवं संदिग्ध (Suspected) मामलों की रिपोर्टिंग में तनिक भी विलंब न किया जाए। इस कार्यशाला के माध्यम से तैयार होने वाले मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य पशु चिकित्सकों और पैरा-वेटरिनरी कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे पूरे प्रदेश में एक मजबूत और प्रतिक्रियाशील निगरानी तंत्र का निर्माण होगा।

सभी 75 जनपदों से तैयार होंगे 150 विशेषज्ञ; आईवीआरआई और कुमारगंज के वैज्ञानिक दे रहे कड़े प्रशिक्षण

इस प्रथम चरण के प्रशिक्षण में सूबे के 36 जनपदों के 72 सरकारी पशु चिकित्सक भाग ले रहे हैं। इसके पश्चात, 16-17 जुलाई को आयोजित होने वाले द्वितीय चरण में शेष 39 जनपदों के वेटरनरी सर्जन्स को कवर किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी 75 जिलों में कुल 150 दक्ष मास्टर ट्रेनर्स की फौज तैयार हो जाएगी। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली और आचार्य नरेंद्र देव पशु चिकित्सा महाविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) के शीर्ष वैज्ञानिक इन डॉक्टरों को एवियन इन्फ्लुएंजा, लेप्टोस्पायरोसिस, जापानी इंसेफेलाइटिस, रेबीज, ब्रुसेलोसिस और लम्पी स्किन डिजीज जैसे जानलेवा संक्रामक रोगों के लक्षण, जैव सुरक्षा (Biosafety), प्रयोगशाला जांच तथा नमूनों के सुरक्षित परिवहन की बारीकियां सिखा रहे हैं। उद्घाटन सत्र में निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. संगीता तिवारी और झपाइगो के स्टेट लीड डॉ. संजय त्रिपाठी सहित अनेक उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

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