प्रो. एम. ए. जाफरी ने शोध, शिक्षण और गुणवत्ता आधारित चिकित्सा पर दिया विशेष जोर
वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं राष्ट्रीय यूनानी वैद्यक संस्थान (एनआईयूएम), बेंगलुरु के पूर्व निदेशक तथा जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. एम. ए. जाफरी के सम्मान में राजधानी स्थित राजकीय तकमिलुत्तिब कॉलेज में भव्य स्वागत एवं विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के सातों परास्नातक विभागाध्यक्षों ने उनका स्वागत किया।
शिक्षण पद्धति पर विशेष व्याख्यान
संस्थान के प्राचार्य प्रो. अब्दुल कवि ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि संस्थान के अनेक शिक्षक एनआईयूएम, बेंगलुरु से शिक्षित हैं और उन्हें प्रो. जाफरी के मार्गदर्शन में सीखने का अवसर मिला। उन्होंने प्रो. जाफरी के यूनानी चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में योगदान को प्रेरणादायी बताया।
शोधार्थियों को मिला प्रेरक मार्गदर्शन
अपने व्याख्यान “Teaching Methodology of Unani Medicine” में प्रो. जाफरी ने आधुनिक शिक्षण पद्धति, गुणवत्तापूर्ण शोध और साक्ष्य-आधारित यूनानी चिकित्सा को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने शोधार्थियों से नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और निरंतर अध्ययन को अपनाने का आह्वान किया।
अनुभवों ने बढ़ाया आत्मविश्वास
परास्नातक विभागाध्यक्ष प्रो. मनीराम सिंह ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि शोध कार्य के दौरान दवाओं की पहचान और मानकीकरण पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति प्रो. जाफरी के सहयोग से संस्थान द्वारा कराई गई थी। उन्होंने इसे शोधार्थियों के प्रति उनके संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण बताया।
शिक्षा और शोध को नई दिशा
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शमीम इरशाद ने किया। इस अवसर पर प्रो. सफिया लोखंडे, प्रो. जिया बेग, प्रो. अब्दुल हकीम, प्रो. मोहम्मद शाकिब, डॉ. कादरी, डॉ. अबूबकर सहित लगभग 150 शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यूनानी चिकित्सा शिक्षा, शोध और अकादमिक उत्कृष्टता को नई दिशा देने का संदेश दिया।
Vittiya Samaveshan Ki Pathshala
