सरकार ने दोगुनी की क्रेडिट गारंटी सीमा, छोटे उद्यमों के लिए खुलेंगे विकास के नए द्वार
वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वित्तीय मजबूती देने और उद्यमिता को नई गति प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने क्रेडिट गारंटी योजना (CGS) को और अधिक प्रभावी बना दिया है। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को बिना संपार्श्विक (Collateral) और बिना किसी तीसरे पक्ष की गारंटी के ऋण उपलब्ध कराने वाली क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) योजना अब कारोबार विस्तार का मजबूत आधार बनने जा रही है।
₹10 करोड़ तक बढ़ी गारंटी सीमा
सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से योजना के तहत अधिकतम गारंटी सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दी है। इससे उद्योगों को बड़े निवेश और विस्तार के लिए अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
सस्ता हुआ ऋण सुरक्षा कवच
उद्यमियों की लागत कम करने के लिए वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) की मानक दर में 50 प्रतिशत की कटौती की गई है। अब यह घटकर केवल 0.37 प्रतिशत प्रतिवर्ष रह गई है, जिससे छोटे उद्योगों पर वित्तीय बोझ कम होगा।
महिला उद्यमियों को विशेष बढ़ावा
महिला नेतृत्व वाले उद्यमों, प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों और विशेष श्रेणी के एमएसई के लिए गारंटी कवरेज को और मजबूत किया गया है। वहीं, भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशों के अनुसार ₹20 लाख तक के एमएसएमई ऋण पर बैंकों को किसी प्रकार की संपार्श्विक सुरक्षा स्वीकार नहीं करनी होगी, जिससे छोटे कारोबारियों के लिए ऋण प्राप्त करना और आसान होगा।
पिछड़े जिलों पर विशेष फोकस
ऋण से वंचित जिलों (ICDD) में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए CGTMSE द्वारा वार्षिक गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट और 5 प्रतिशत अतिरिक्त गारंटी कवरेज प्रदान किया जा रहा है। तमिलनाडु में विनिर्माण इकाइयों के लिए राज्य सरकार के सहयोग से तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (TNCGS) भी लागू की गई है।
वित्तीय समावेशन को मिलेगी नई रफ्तार
केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में जानकारी दी कि योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के माध्यम से की जा रही है। साथ ही एमएसएमई मंत्रालय, सीजीटीएमएसई, सिडबी, बैंकों और उद्योग संगठनों के सहयोग से देशभर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक उद्यमी इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर भारत के औद्योगिक विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
Vittiya Samaveshan Ki Pathshala
