शकुन्तला विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षांत समारोह 31 जुलाई को
130 मेधावियों को 156 पदक, 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने रचा उत्कृष्टता का नया इतिहास
वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय एक बार फिर समावेशी शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता का नया अध्याय लिखने जा रहा है। 31 जुलाई को आयोजित होने वाले 13वें दीक्षांत समारोह में 1,919 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी, जबकि 130 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 156 पदकों से सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने अपने दो वर्षीय कार्यकाल की उपलब्धियां साझा करते हुए इसे समावेशी शिक्षा की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
मेधा का होगा सम्मान
दीक्षांत समारोह में 76 स्वर्ण, 40 रजत और 40 कांस्य पदक प्रदान किए जाएंगे। कुल 955 छात्राएं और 964 छात्र उपाधियां प्राप्त करेंगे, जबकि 17 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। यह समारोह प्रतिभा, परिश्रम और ज्ञान की नई ऊंचाइयों का उत्सव बनेगा।

दिव्यांग प्रतिभाओं ने रचा इतिहास
इस वर्ष 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने कुल 45 पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया कि इच्छाशक्ति के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती। इनमें 22 स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा नीति की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
तकनीक बनी नई ताकत
कुलपति ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विश्वविद्यालय में ई-गवर्नेंस, समर्थ पोर्टल, एआई आधारित स्मार्ट चश्मे, स्क्राइब-फ्री परीक्षा व्यवस्था तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अत्याधुनिक सहायक तकनीकों को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों द्वारा स्वयं उत्तर पुस्तिका लिखकर परीक्षा देना इस परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण है।
शोध और नवाचार को नई गति
विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने दो वर्षों में 60 शोध परियोजनाएं विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों को भेजीं। अनुसंधान, नवाचार और तकनीक आधारित शिक्षा को संस्थान की प्राथमिकता बनाया गया है, जिससे शिक्षा और समाज दोनों को लाभ मिल सके।
संवेदनशील समाज की दिशा में कदम
आचार्य संजय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसा समाज तैयार करना है जहां समान अवसर, संवेदनशीलता और आत्मनिर्भरता जीवन का आधार बनें। शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों को जोड़ना ही विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पहचान है।
Vittiya Samaveshan Ki Pathshala
