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नियामकीय अनुशासन को ठेंगा दिखाने पर आरबीआई सख्त: मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस लिमिटेड पर दंडात्मक कार्रवाई

 वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल 

 वित्तीय क्षेत्र में लापरवाही और नियमों की अनदेखी करने वाली संस्थाओं के खिलाफ रिजर्व बैंक का अभियान लगातार जारी है। केंद्रीय बैंक (RBI) ने 13 जुलाई, 2026 के एक कड़े दंडात्मक आदेश के माध्यम से मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस लिमिटेड पर ₹2.70 लाख (दो लाख सत्तर हजार रुपये) का मौद्रिक जुर्माना थोप दिया है। यह कार्रवाई ‘नो योर कस्टमर (KYC) निर्देशों’ के बेहद संवेदनशील प्रावधानों का उल्लंघन करने पर की गई है। आरबीआई ने भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58G(1)(b) और 58B(5)(aa) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह चोट की है।

वैधानिक जांच में खुली पोल: सिस्टम में गंभीर खामियां उजागर इस वित्तीय संस्थान के दावों की हवा तब निकल गई जब आरबीआई ने 31 मार्च, 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर इसका वैधानिक निरीक्षण किया। केंद्रीय बैंक की निगरानी टीम ने पाया कि कंपनी नियामकीय अनुशासन को लागू करने में बुरी तरह नाकाम रही है। इसके बाद कंपनी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया। व्यक्तिगत सुनवाई में दी गई मौखिक दलीलों और कंपनी के लिखित स्पष्टीकरण के बाद भी आरबीआई ने पाया कि कंपनी के खिलाफ वित्तीय लापरवाही के गंभीर आरोप पूरी तरह सही और अक्षम्य हैं।

छह महीने वाली अनिवार्य गाइडलाइन दरकिनार: जोखिम निगरानी में बड़ी चूक केंद्रीय बैंक की जांच में जो सबसे गंभीर और खतरनाक चूक साबित हुई है, वह यह है कि मुथूट व्हीकल एंड एसेट फाइनेंस लिमिटेड अपने ग्राहकों के खातों के ‘जोखिम वर्गीकरण’ (Risk Categorisation) की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए कोई भी अनिवार्य सिस्टम बनाने में नाकाम रहा। आरबीआई के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के मुताबिक, हर 6 महीने में कम से कम एक बार खातों के जोखिम की समीक्षा होना अनिवार्य है, जिसे कंपनी ने पूरी तरह नजरअंदाज किया।

सुरक्षा मानकों से समझौता: केवल वित्तीय जुर्माना नहीं, आगे बड़ी कार्रवाई की चेतावनी मुख्य महाप्रबंधक ब्रिज राज द्वारा प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026-2027/702 के तहत जारी आदेश में साफ कहा गया है कि यह सख्त कार्रवाई संस्थान के नियामकीय अनुपालन में रही आपराधिक कमियों पर आधारित है। हालांकि यह जुर्माना ग्राहकों के साथ मौजूदा समझौतों की वैधता को प्रभावित नहीं करता, लेकिन आरबीआई ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह मौद्रिक दंड कंपनी के खिलाफ भविष्य में की जाने वाली किसी भी अन्य कठोर प्रशासनिक या कानूनी दंडात्मक कार्रवाई को सीमित नहीं करेगा।

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