वित्तीय समावेशन की पाठशाला समाचार पटल
संसद में जानकारी देते हुए आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने स्पष्ट किया कि ‘शहरी नियोजन’ राज्य सूची का विषय है। विभिन्न शहरों में भीड़भाड़ कम करने, अवसंरचना विकसित करने तथा सार्वजनिक परिवहन परियोजनाओं को डिजिटल बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।
राष्ट्रीय दिशानिर्देशों से मिल रहा बुनियादी दिशा-निर्देश
सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो परियोजनाओं के सुचारू संचालन के लिए केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति 2006’ और ‘मेट्रो नीति 2017’ जैसे ढांचागत दिशानिर्देश लागू किए हैं। यद्यपि वर्तमान में डिजिटल टिकटिंग और अंतिम छोर तक संपर्क के लिए कोई पृथक राष्ट्रीय स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन योजना नहीं है, फिर भी राज्य सरकारों के प्रस्तावों पर केंद्र वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
‘एक राष्ट्र, एक कार्ड’: एनसीएमसी से सुगम और डिजिटल यात्रा
शहरी आवागमन को आधुनिक बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय कॉमन मोबिलिटी कार्ड’ (NCMC) का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है। रुपे चिप (qSPARC) आधारित यह प्रणाली वर्तमान में 13 मेट्रो परियोजनाओं और 11 बस परिवहन निगमों में पूरी तरह क्रियाशील है। पीएम ई-बस सेवा और पीएम ई-ड्राइव जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली (AFCS) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
क्षमता निर्माण और भावी योजनाओं को केंद्रीय वित्तीय सहायता
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की उप-योजना के अंतर्गत एकीकृत गतिशीलता योजना, डीपीआर (DPR) और बहु-माध्यमीय एकीकरण परियोजनाओं के निर्माण हेतु राज्यों को केंद्रीय मदद दी जाती है। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाकर सार्वजनिक परिवहन को जन-जन की पहली पसंद बनाना है।
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