निर्मला सीतारमण बोलीं—विकास का अगला चरण साझेदारी, भरोसे और मजबूत दीर्घकालिक ढांचे पर निर्भर
निजी पूंजी बने विकास की ताकत
वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने जयपुर में आयोजित ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान ‘द रोल ऑफ द न्यू डेवलपमेंट बैंक इन मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल इन मेंबर कंट्रीज’ विषयक सेमिनार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर निजी पूंजी जुटाने में बहुपक्षीय विकास बैंकों की भूमिका निर्णायक है।
जोखिम घटाना जरूरी
वित्त मंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं में निवेश का जोखिम कम करना, उन्हें बैंकिंग के लिहाज से आकर्षक बनाना और निवेशकों का भरोसा बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए बहुपक्षीय विकास बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल
भारत के अनुभव का उल्लेख करते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार ने लगातार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और संरचनात्मक सुधारों के जरिए अवसंरचना इकोसिस्टम को मजबूत किया है। राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल अवसंरचना और ऊर्जा नेटवर्क में निवेश को दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिसंपत्तियों के निर्माण की रणनीति का हिस्सा बताया गया।
सरकारी पूंजी बने उत्प्रेरक
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक पूंजी का उद्देश्य निजी निवेश का विकल्प बनना नहीं, बल्कि उसे आकर्षित करने वाला उत्प्रेरक बनना है। इसी दिशा में सरकार ने वायबिलिटी गैप फंडिंग, हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल, क्रेडिट एन्हांसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट, नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और पीएम गति शक्ति जैसी पहलें आगे बढ़ाई हैं।
बजट में निजी निवेश पर जोर
केंद्रीय बजट 2026-27 में निजी क्षेत्र के निवेश को गति देने के लिए नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, राष्ट्रीय जलमार्गों और तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना जैसे उपायों का उल्लेख किया गया।
ब्रिक्स के सामने साझा चुनौती
सीतारमण ने कहा कि ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास की प्रमुख शक्तियां हैं, लेकिन निजी पूंजी जुटाने में उन्हें समान संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। चुनौती केवल पूंजी उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि भरोसा, स्थिरता, पूर्वानुमेयता और विश्वसनीय दीर्घकालिक ढांचे तैयार करने की भी है।
साझेदारी ही भविष्य
आर्थिक कार्य विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने भी दीर्घकालिक और टिकाऊ वित्तीय ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया। सेमिनार में नीति निर्माताओं, बहुपक्षीय संस्थाओं, निजी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने विकास वित्त और निजी पूंजी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
सीतारमण ने कहा कि विकासात्मक वित्त का भविष्य सरकार, बहुपक्षीय संस्थाओं और निजी क्षेत्र की साझेदारी में निहित है।
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