एआई-एमएल तकनीक, डीपीडीपी कानून और ‘1930’ हेल्पलाइन से उपभोक्ताओं को मिला सुरक्षा कवच
डिजिटल वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वास बढ़ाने की निर्णायक पहल
वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
देश में तेजी से विस्तार कर रहे डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक क्षेत्र को सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने व्यापक सुरक्षा ढांचा लागू कर दिया है। डिजिटल लोन ऐप्स, पेमेंट एग्रीगेटरों और साइबर धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, जिनका लक्ष्य करोड़ों डिजिटल उपभोक्ताओं को सुरक्षित वित्तीय वातावरण उपलब्ध कराना है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार ने वित्तीय क्षेत्र के नियामकों और विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक समीक्षा के बाद डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा, साइबर जोखिम प्रबंधन और स्व-नियमन व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाया है।
स्व-नियमन से बढ़ेगी जवाबदेही
आरबीआई ने स्व-नियामक संगठन (SRO-FT) का ढांचा लागू कर फिनटेक कंपनियों के लिए आचार, पारदर्शिता और जवाबदेही के नए मानक तय किए हैं। इसके साथ ही मोबाइल एवं वेब आधारित बैंकिंग सेवाओं के लिए न्यूनतम साइबर सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य कर दिया गया है।
एआई और मशीन लर्निंग से धोखाधड़ी पर निगरानी
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) अब यूपीआई लेनदेन की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित उन्नत प्रणाली का उपयोग कर रहा है। इससे संदिग्ध ट्रांजैक्शन की तत्काल पहचान कर उन्हें रोकने में सहायता मिल रही है।
डेटा सुरक्षा को मिला कानूनी संरक्षण
डिजिटल उपभोक्ताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP) तथा उसके नियम लागू किए जा चुके हैं। इससे डेटा के दुरुपयोग पर नियंत्रण और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ेगी।
साइबर ठगों पर डिजिटल शिकंजा
वित्तीय धोखाधड़ी से पीड़ित नागरिकों के लिए गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल, 1930 हेल्पलाइन, SACHET पोर्टल तथा eBAAT जागरूकता अभियान लगातार सक्रिय हैं। ये मंच अवैध लोन ऐप्स, फर्जी निवेश योजनाओं और साइबर अपराधों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई और जागरूकता दोनों सुनिश्चित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और आरबीआई की ये संयुक्त पहल भारत के डिजिटल वित्तीय तंत्र को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
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