170 कंपनियां, ₹8,117 करोड़ निवेश… लेकिन यूपी के हिस्से सिर्फ ₹4.63 करोड़
रोजगार सृजन में भी खाता नहीं खुला, टेक्सटाइल सेक्टर में राज्य की रफ्तार पर बड़े सवाल
गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक निकले आगे, यूपी अवसर गंवाता दिखा
Press Release Page _ Press Information Bureau PLI textile sectror
वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के नवीनतम आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश के औद्योगिक प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देशभर में वस्त्र क्षेत्र की 170 कंपनियों ने ₹8,117.64 करोड़ का निवेश किया और 33,427 नए रोजगार सृजित किए, लेकिन उत्तर प्रदेश इस दौड़ में लगभग हाशिये पर दिखाई दिया।
लोकसभा में वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्र मार्घेरिटा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 15 कंपनियों को मंजूरी मिलने के बावजूद 31 मार्च 2026 तक केवल ₹4.63 करोड़ का वास्तविक निवेश दर्ज हुआ, जबकि रोजगार सृजन का आंकड़ा शून्य रहा। यह स्थिति तब है जब राज्य स्वयं को देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बताता रहा है।
दूसरे राज्यों ने मारी बाजी
जहां गुजरात ने ₹1,903.38 करोड़ निवेश के साथ 4,493 रोजगार, तमिलनाडु ने ₹1,277.16 करोड़ निवेश के साथ 7,930 रोजगार और कर्नाटक ने ₹1,515.99 करोड़ निवेश के साथ 5,611 रोजगार सृजित किए, वहीं उत्तर प्रदेश निवेश और रोजगार—दोनों मोर्चों पर बेहद कमजोर साबित हुआ।
निवेश आया, रोजगार नहीं
आंकड़ों का सबसे चिंताजनक पक्ष यह है कि राज्य में निवेश का स्तर भी अत्यंत सीमित रहा और रोजगार सृजन का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं हुआ। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि स्वीकृत परियोजनाएं आखिर जमीन पर क्यों नहीं उतर सकीं।
औद्योगिक दावों पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तर प्रदेश को टेक्सटाइल विनिर्माण का राष्ट्रीय केंद्र बनना है, तो केवल निवेश समझौतों की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, औद्योगिक अवसंरचना और निवेशकों का विश्वास मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक होगा।
हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पीएलआई योजना के क्रियान्वयन में लागत संबंधी किसी देरी की सूचना प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन उत्तर प्रदेश के आंकड़े यह संकेत अवश्य देते हैं कि राज्य को निवेश को वास्तविक उत्पादन और रोजगार में बदलने की दिशा में कहीं अधिक प्रभावी प्रयास करने होंगे।
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Vittiya Samaveshan Ki Pathshala
