जून 2026 में ओएफडीआई प्रतिबद्धता में तेज गिरावट, वैश्विक विस्तार पर उठे सवाल
एक महीने में 34% और सालाना आधार पर लगभग 48% की कमी
इक्विटी, ऋण और गारंटी—तीनों मोर्चों पर सुस्ती के संकेत
वित्तीय समावेशन की पाठशाला | समाचार पटल
भारतीय कंपनियों के विदेशी विस्तार की रफ्तार पर फिलहाल ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (OFDI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में कुल वित्तीय प्रतिबद्धता घटकर 2.99 अरब अमेरिकी डॉलर रह गई, जो मई 2026 के 4.51 अरब डॉलर और जून 2025 के 5.74 अरब डॉलर की तुलना में काफी कम है।
आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेश प्रतिबद्धता में मासिक आधार पर लगभग 34 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर लगभग 48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान वैश्विक निवेश माहौल में बढ़ती अनिश्चितताओं और कंपनियों के सतर्क निवेश दृष्टिकोण का संकेत हो सकता है।
विदेशी निवेश के प्रमुख घटकों में भी कमजोरी दिखाई दी। इक्विटी निवेश जून 2026 में 738.32 मिलियन डॉलर रहा, जबकि मई में यह 1.25 अरब डॉलर और एक वर्ष पहले 2.20 अरब डॉलर था। इसी प्रकार विदेशी ऋण निवेश 469.87 मिलियन डॉलर तथा गारंटी जारी करने का आंकड़ा 1.78 अरब डॉलर रहा, जो दोनों ही पिछले महीनों और पिछले वर्ष की तुलना में कम हैं।
हालांकि यह आंकड़े प्रारंभिक हैं और अधिकृत डीलर (AD) बैंकों द्वारा की जाने वाली ऑनलाइन रिपोर्टिंग के आधार पर संशोधित हो सकते हैं, फिर भी इनसे यह संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां फिलहाल वैश्विक विस्तार को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना रही हैं।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गिरावट आने वाले महीनों में भी जारी रहती है तो इसका असर भारतीय कंपनियों की वैश्विक निवेश रणनीति और अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है।
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